" किसी भी प्रोग्राम की प्रोग्रामिंग करने के लिए सर्वप्रथम प्रोग्राम के समस्त निर्दिष्टीकरण को भली-भांति समझ लेना चाहिए। प्रोग्राम में प्रायुक्त की गयी समस्त शर्तों का अनुपालन सही से हो रहा है अथवा नहीं , इसकी भी जांच करना जरूरी होता है। "
अब प्रोग्राम के जांच निर्दिष्टीकरण को जांच समझने के उपरांत प्रोग्राम के शुरू से वांछित परिणाम प्राप्त होने तक के सभी निर्देशों को विधिवत क्रमबद्ध कर लेना चाहिए अर्थात प्रोग्रामो की Designing करके करनी चाहिए। प्रोग्राम को भली-भांति जांच कर प्रोग्राम की कोडिंग (Coding) करनी चाहिए। इसके पश्चात प्रोग्राम में data इनपुट करके प्रोग्राम की जांच की जाती है की वास्तव में सही परिणाम प्राप्त हो रहा है अथवा नहीं। यदि परिणाम सही प्राप्त नहीं होते है तो इसका मतलब है कि प्रोग्राम के किसी निर्देश का क्रम गलत है अथवा निर्देश किसी स्थान पर गलत दिया गया है। यदि परिणाम सही प्राप्त होता है तो प्रोग्राम के दिये गए निर्देशों के क्रम को एकबद्ध (Integrate) कर लिया जाता है एंव निर्देशों के इस क्रम को कम्प्यूटर में स्थापित (Install) कर दिया जाता है। इस प्रकार प्रोग्रामिंग कि संपूर्ण प्रक्रिया सम्पन्न हो जाती है।
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